Champaran Mutton, बिहार की लघु फिल्म ऑस्कर की छात्र अकादमी की रेस में

Champaran Mutton
Champaran Mutton ऑस्कर के स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड के सेमीफाइनल राउंड में जगह बनाने वाली 16 फिल्मों से प्रतिस्पर्धा करेगी।

चंपारण मटन (Champaran Mutton) बिहार का एक मशहूर मांसाहारी व्यंजन है और अब इसी नाम से बनी एक फिल्म अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टूडेंट अकादमी अवार्ड्स (छात्र ऑस्कर्स, Student Academy Awards or Oscars) के सेमीफइनल में पहुंच गयी है। ‘चंपारण मटन’ लघु फिल्म का निर्देशन फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (एफटीआईआई) पुणे के रंजन कुमार, जो कि बिहार (Bihar) के हाजीपुर के रहने वाले हैं, ने किया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर की फलक खान फिल्म के मुख्य कलाकारों में से एक हैं और ‘चंपारण मटन’ के स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड के सेमीफाइनल दौर में पहुंचने के बाद अपनी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। ”मैं पूरी टीम और इस उपलब्धि की आभारी हूं। यह हम सभी की कड़ी मेहनत का नतीजा है,” उन्होंने कहा।

फलक ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ‘चम्पारण मटन’ ऑस्कर के स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड के फाइनल दौर में भी पहुंचेगी और भारत एवं बिहार का नाम रोशन करेगी। फिल्म एक मध्यमवर्गीय परिवार और लॉकडाउन के दौरान उनके सामने आने वाली समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जब कई लोगों की नौकरियां चली गईं।

कहानी हीरो और उसके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी पत्नी की इच्छा को पूरा करने के लिए घर से बहार निकलता है। लॉकडाउन के दौरान नौकरी छूटने के बाद अपने गांव लौटने का उनका दृढ़ संकल्प दर्शकों के दिलों में घर कर गया। फिल्म का हृदयस्पर्शी चित्रण इसे प्रतिष्ठित ऑस्कर नामांकितों के बीच एक योग्य स्थान दिलाता है।

Champaran Mutton की कहानी

“यह एक ऐसे युवक की कहानी है, जो लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हो गया है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद उस लड़की को पाने की कोशिश करता है जिससे वह प्यार करता है। यह फिल्म ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित है,” उन्होंने बताया। उनका मानना है कि ‘चंपारण मटन’ बिहार के लोगों की अदम्य भावना का खूबसूरती से प्रतीक है।

यह ऑस्कर के स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड के सेमीफाइनल राउंड में जगह बनाने वाली 16 फिल्मों से प्रतिस्पर्धा करेगी।इस पुरस्कार के लिए दुनिया भर के फिल्म प्रशिक्षण संस्थानों की 1,700 से अधिक फिल्मों को नामांकित किया गया था।

‘चंपारण मटन’, एक ऐसी फिल्म है जिसने दिल और ध्यान दोनों को समान रूप से आकर्षित किया है। रंजन कुमार के लिए ‘चंपारण मटन’ का ऑस्कर तक का सफर उनके समर्पण और प्रतिभा का प्रमाण है।

ऑस्कर दिशानिर्देशों के अनुसार, एक लघु फिल्म 40 मिनट या उससे कम समय तक चलने वाली एक मूल चलचित्र होती है, जिसमें सभी क्रेडिट शामिल होते हैं।