Hariyali Teej: अगर करेंगी सोलह श्रृंगार तो पति की उम्र होगी लम्बी, सोलह श्रृंगार की है खास अहमियत

Hariyali Teej पर महिलाओं को  श्रृंगार करना चाहिए ऐसी मान्यता है की इससे घर में सुख और समृद्ध‍ि आ‍ती है और अखंड सौभाग्य का वरदान भी मिलता है।

भारत परंपराओं का देश है,यहां की हर प्रथा के पीछे एक राज छुपा हुआ है, अचरज तो तब होता है जब इंसान इन प्रथाआों का पालन तो लंबे समय से करता  लेकिन इसके पीछे का अर्थ उसे पता नहीं होता है। हमारी परंपराओं में महिलाओं का श्रृंगार भी छुपा हुआ है।

Hariyali Teej पर महिलाओं को  श्रृंगार करना चाहिए ऐसी मान्यता है की इससे घर में सुख और समृद्ध‍ि आ‍ती है और अखंड सौभाग्य का वरदान भी मिलता है। यही वजह है की हर सुहागन तीज त्योहारों पर सोलह श्रृंगार करती है।

चलिए जानते हैं इसका महत्व…

31 जुलाई को Hariyali Teej मनाई जाएगी। सुहागिन स्त्रियों को हर साल इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार रहता है। अपने सुहाग की रक्षा और पति की लंबी आयु के लिए इस दिन (Hariyali Teej )विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार कर देवी पार्वती और शंकर जी की पूजा करती हैं । हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार बहुत मायने रखता है ।हिन्दू महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार का विशेष महत्व है। विवाह के बाद स्त्री इन सभी चीजों को अनिवार्य रूप से धारण करती है। हर एक चीज का अलग महत्व है। हर स्त्री चाहती है की वे सज धज कर सुन्दर लगे यह उनके रूप को ओर भी अधिक सौन्दर्यवान बना देता है।

मांग टिका

कोई भी पूजा पाठ हो तो महिलाएं मांग टिका जरूर पहनती हैं क्योंकि ये उनके सुहाग का प्रतीक होता है। सिर के बीचोबीच पहना जाने वाला मांग टिका महिलाओं की सुंदरता बढ़ाने के अलावा मस्तिष्क संबंधी क्रियाएं संतुलित और नियमित रखता है।

सिंदूर

शरीर-रचना विज्ञान के अनुसार जिस स्थान पर सिंदूर सजाया जाता है, वह ब्रह्मरंध्र और अहिम नामक मर्मस्थल के ठीक ऊपर होता है, जो अत्यंत कोमल होता है। यहां सिंदूर लगाने से इस स्थान की सुरक्षा होती है। मान्यताओं के अनुसार इसका एक महत्व ये भी है कि सिंदूर की रेखा पति की तरक्की को दिखाती है। जितनी ज्यादा लंबी रेखा पति के लिए उतनी ही तरक्की की गुंजाइश मानी जाती है। इस रेखा को छोटा नहीं होने दिया जाता है और इसलिए पत्नी हमेशा ही जितनी लंबी हो सके उतनी लंबी सिंदूर की रेखा लगाती हैं।

लाल जोड़ा

उत्तर भारत में आमतौर से शादी के वक्त दुल्हन को शादी का लाल जोड़ा पहनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में फेरों के वक्त दुल्हन को लाल जोड़ा ही पहनाया जाता है। लाल जोड़े को प्रेम का और मधुरता का प्रतीक माना जाता है यही वजह है कि दुल्हन लाल जोड़ा पहनती है। लाल जोड़ा खूबसूरती का भी प्रतीक होता है। आजकल लड़कियां भले ही अपने मर्जी के मुताबिक शादी के जोड़े पहन लेती है लेकिन लाल रंग को प्राचीन काल से ही शादी का जोड़ा और रंग माना जाता है।

बालों में गजरा (फूल)

घने बालों को महिलाओं की सुंदरता का प्रतीक माना गया है, ये उनका गहना कहा जाता है, बालों को गजरे व फूलों से सजाने पर उनकी खुशबू से की सेहत पर अच्छा असर होता है और सुगंध से मन तरंगित व खुश रहता है। फूल मां लक्ष्मी को काफी प्रिय हैं, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए फूलों से पूजा होती है और महिलाएं घर की लक्ष्मी होती हैं इसलिए उन्हें खुश रखने के लिए बालों में गजरा लगाने की प्रथा बनाई गई है।

मेकअप

हर महिला सुंदर दिखना चाहती है। इसके लिए वो make up करके अपने चेहरे को खूबसूरत बनाती हैं। चेहरे पर हल्का मेकअप व नेल पेंट लगाने से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

काजल

काजल भी उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा देता है। इसको लगाने से जहाँ आंखों को ठंडक मिलती है वहीं इससे आंखों से जुड़ी कई समस्याएं भी दूर होती हैं।
बिंदी बिंदी माथे पर लगाने से महिलाएं आकर्षक दिखती हैं और ये उनके सुहागन होने का प्रतीक भी है। । बिंदी लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है और इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है। साथ ही मस्तिष्क भी शांत रहता है और सुकून का अनुभव होता नथनी- ये हर सुहागन को उसके शादी के मंडप पर सिंदूर दान के बाद पहना दिया जाता है ताकि उनके पति की उनके सुहाग की लंबी आयु हो। पूजा पाठ में इसको जरूर पहंती हैं महिला।

मंगलसूत्र

मंगलसूत्र सुहागंन होने को दर्शाता है। इसके मोतियों से होकर निकलने वाली वायु महिलाओं के इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। आयुर्वेद के अनुसार, गले में स्वर्ण धातु धारण करने से छाती और ह्रदय स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद काले मोती महिलाओं को बुरी नजर से बचाते हैं।

मेहंदी

हाथों में लगी और रची मेहंदी हथेलियों को सुंदर बनाने के साथ-साथ शरीर को ठंडा रखती है और चर्म रोग को दूर करने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त त्यौहार या अन्य किसी शुभ अवसर पर मेहंदी लगाना सुखी खुशहाली और समृद्ध जीवन की निशानी होती है. जिस परिवार की महिलाएँ और लड़कियाँ अपने हाथों पर मेहंदी लगती है, वहाँ देवी-देवता निवास करते हैं. इसके अलावा उन पर देवी की असीम कृपा भी बनी रहती है. कहा जाता है कि एक बार माँ दुर्गा के क्रोध को शांत करने के लिए ,देवी-देवताओं ने माता को मेहँदी से सजाया था. तब से किसी भी विशेष अवसर पर मेहंदी लगाने को शुभ माना जाता है।

पायल

पायल को सुहाग से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि हमेशा चांदी की पायल पहनने का ही विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए पैरों में चांदी की पायल पहनती हैं। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में चांदी की पायल का संबंध चंद्रमा से बताया गया है।

बिछिया

जब हम किसी को पैरों में बिछिया पहने देखते हैं तो अंदाजा लगा लेते हैं कि को शादीशुदा है। यूं कहा जाए कि दुल्हन के सोलह श्रृंगार में से एक बिछिया का महत्व न सिर्फ आभूषण के रूप में बल्कि वैवाहिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए भी बहुत ज्यादा है। बिछिया को विवाह की निशानी के रूप में देखा जाता है और सोलह श्रृंगार में से मुख्य माना जाता है। शादी के बाद हम अपने दोनों पैरों की दो या तीन उंगलियों में बिछिया पहनते हैं जिससे वैवाहिक संबंध अच्छे बने रहते हैं। इसके साथ ही बिछिया को ऐसा आभूषण माना जाता है जो माता लक्ष्मी को आकर्षित करती है। इसी वजह से बिछिया को शादी के बाद एक अनिवार्य आभूषण माना जाता है।

नथ

ऐसी मान्यता है कि सुहागिन स्त्री के नथ पहनने से पति के स्वास्थ्य और धन-धान्य में वृद्धि होती है। ऐसी मान्यता है कि सुहागिन स्त्री के नथ पहनने से पति के स्वास्थ्य और धन-धान्य में वृद्धि होती है। कहते हैं, नथ पहनने का सीधा संबंध महिला के गर्भाशय से होता है। नाक की कुछ नसें गर्भ से जुड़ी होती हैं जिसके कारण डिलीवरी के समय कम दर्द सहना पड़ता है।इसलिए हरतालिका तीज के अवसर पर नथ पहनना न भूलें।

कमरबंद

यह न सिर्फ महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाता है बल्कि उनको एक अलग लुक भी देता है। इस गहने से उनकी खूबसूरती और निखरकर आती है। यह सुहाग की भी निशानी होती है। इसे शादीशुदा महिलाओं के गृह स्वामिनी बनने का प्रतीक भी माना जाता है। कमरबंद से पेट संबंधित समस्या नहीं होती इससे हार्निया जैसी बीमारीयां होने का खतरा कम होता है।

आलता

सौभाग्य में वृद्धि के लिए होने वाली दुल्हन और कन्याओं को भी आलता लगाया जाता है। आलता लगाना काफी शुभ माना जाता है और इसके बिना श्रृंगार भी अधूरा माना जाता है. इसी वजह से बहुत सारे राज्यों में शुभ कार्यों के दौरान महावर लगाना जरूरी माना जाता है

चूड़ियां

भारत में विवाहित महिलाएं हाथों में चूड़ियां पहनती है। कांच की चूड़ियां सुहागन महिलाओं के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। सवाल यह है कि सिर्फ कांच की चूड़ियां ही सुहाग का प्रतीक क्यों मानी जाती है, यदि सुहागन महिलाएं नहीं कांच की चूड़ियां नहीं पहनें तो क्या सचमुच पति की उम्र घट जाती है, या फिर पुरुषों ने चूड़ियों की परंपरा इसलिए शुरू करवा दी ताकि महिलाओं के आने से पहले उन्हे इसका पता चल जाए और वो सतर्क हो जाएं। विवाहित महिलाएंके लिए सिंदूर की तरह ही चूड़ियों का भी महत्व है.

 

 

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